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BHDC 110 : हिंदी कहानी in Hindi Solved Assignment 2025-26

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Course Code : BHDC 110

Course Title : हिंदी कहानी

Assignment Code : : BHDC 110/TMA/2025-26

Session : Valid for Admission July 2025 and January 2026

Maximum Marks : 100

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BHDC 110 : हिंदी कहानी Solved Assignment 2025-26

Assignment Title : BHDC 110 Solved Assignment in Hindi

Course Code : BHDC 110

Course Title : हिंदी कहानी

Assignment Code : BHDC 110/TMA/2025-26

Maximum Marks : 100

Title : BHDC 110 Solved Assignment in Hindi 2025-26

Course : CBCS/BAG

University Name : IGNOU

Service Type : Solved Assignment (Soft Copy)

Language : Hindi Medium 

Session : Valid for Admission July 2025 and January 2026

Short Name : BHDC 110

Assignment Code : BHDC 110/TMA/2025-26

Product : Assignment of BHDC 110 (IGNOU)

खंड-1

निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

1. “सोचो माँ को मेरा घर में होना ही बुरा लगता था। पिताजी को मेरे संगीत सीखने से चिढ़ थी। वे कहा करते थे कि मेरा घर-घर है रंडीखाना नहीं। भाइयों का जो थोड़ा-बहुत प्यार था, वह भी भाभियों के आने के बाद छिन गया। मैंने आज तक कितनी कितनी मुश्किल से अपनी अम्…अ… पवित्रता को बचाया है, यह मैं ही जानती हूँ। तुम सोच सकते हो कि एक अकेली लड़की के लिए यह कितना मुश्किल होता है। मेरा लाहौर की तरफ घूमने जाने को मन था वहाँ की कुछ तस्वीरें बनाना चाहती थी, मगर मैं वहाँ नहीं गई, क्योंकि मैं सोचती थी कि मर्द की पशु-शक्ति के सामने अम्…अ. मैं अकेली क्या कर सकेंगी। फिर, तुम्हें पता है कि डिपार्टमेंट के लोग वहाँ मेरे बारे में कैसी बुरी-बुरी बातें किया करते थे। इसीलिए मैं कहती हूँ कि मुझे वहाँ के एक-एक आदमी से नफरत है।”

2. “ह्यूबर्ट ही क्यों, वह क्या किसी को चाह सकेगी, उस अनुभूति के संग, जो अब नहीं रही, जो छाया-सी उस पर मॅडराती रहती है, न स्वयं मिटती है. न उसे मुक्ति दे पाती है। उसे लगा, जैसे बादलों का झुरमुट फिर उसके मस्तिष्क पर धीरे-धीरे छाने लगा है, उसकी टोंगे फिर निर्जीव, शिथिल-सी हो गयी हैं।”

3. “मुंशी जी के निबटने के पश्चात सिद्धेश्वरी उनकी जूठी थाली लेकर चौके की जमीन पर बैठ गई। बटलोई की दाल को कटोरे में उड़ेल दिया, पर वह पूरा भरा नहीं। छिपुली में थोड़ी-सी चने की तरकारी बची थी, उसे पास खींच लिया। रोटियों की थाली को भी उसने पास खींच लिया। उसमें केवल एक रोटी बची थी। मोटी भद्दी और जली उस रोटी को वह जूठी थाली में रखने जा रही थी कि अचानक उसका ध्यान ओसारे में सोए प्रमोद की ओर आकर्षित हो गया। उसने लड़के को कुछ देर तक एकटक देखा, फिर रोटी को दो बराबर टुकड़ों में विभाजित कर दिया। एक टुकड़े को तो अलग रख दिया और दूसरे टुकड़े को अपनी जूठी थाली में रख लिया। तदुपरांत एक लोटा पानी लेकर खाने बैठ गई। उसने पहला ग्रास मुँह में रखा और तब न मालूम कहाँ से उसकी आँखों से टप टप आँसू चूने लगे।”

खंड-2

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 700-800 शब्दों में लिखिए।

4. हिन्दी कहानी को परिभाषित करते हुए कहानी के प्रमुख तत्वों का उल्लेख कीजिए ।

5. हिंदी कहानी के विविध आंदोलनों पर प्रकाश डालिए।

6. ‘उसने कहा था कहानी के शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए।

खंड-3

7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए।
(क) ‘मिसपाल’ कहानी का प्रतिपाद्य
(ख) ‘पाजेब’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता

BHDC 110 : हिंदी कहानी in Hind...

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