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BHDE 143 : प्रेमचंद in Hindi Solved Assignment 2025-26

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Course Code : BHDE 143

Course Title : प्रेमचंद

Assignment Code : BHDE 143/TMA/2025-26

Session : Valid for Admission July 2025 and January 2025

Maximum Marks : 100

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BHDE 143 : प्रेमचंद in Hindi Solved Assignment 2024-25

Assignment Title : BHDE 143 Solved Assignment in Hindi

Course Code : BHDE 143

Course Title : प्रेमचंद

Assignment Code : BHDE 143/TMA/2025-26

Maximum Marks : 100

Title : BHDE 143 Solved Assignment in Hindi 2025-26

Course : CBCS/BAG

University Name : IGNOU

Service Type : Solved Assignment (Soft Copy)

Language : Hindi Medium 

Session : Valid for Admission July 2025 and January 2026

Short Name : BHDE 143

Assignment Code : BHDE 143/TMA/2025-26

Product : Assignment of BHDE 143 (IGNOU)

भाग-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
(क) हमारा चरित्र कितना ही दृढ़ हो, पर उस पर संगति का असर अवश्य होता है। सुमन अपने पड़ोसियों को जितनी शिक्षा देती थी, उससे अधिक उनसे ग्रहण करती थी। हम अपने गार्हस्थ्य जीवन की ओर से कितने बेसुध हैं, उसके लिए किसी तैयारी, किसी शिक्षा की जरूरत नहीं समझते। गुड़िया खेलनेवाली बालिका, सहेलियों के साथ विहार करनेवाली युवती, गृहिणी बनने के योग्य समझी जाती है। अल्हड़ बछड़ के कंधे पर भारी जुआ रख दिया जाता है। ऐसी दशा में यदि हमारा गार्हस्थ्य जीवन आनन्दमय न हो तो कोई आश्चर्य नहीं।
(ख) सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। इस विशेष आत्मीयता ने उसमें एक नई स्फूर्ति पैदा कर दी थी, जो हवा के ठंडे झोंकों को तुच्छ समझती थी। वह झपटकर उठा और छपरी के बाहर आकर मूंकने लगा। हल्कू ने उसे कई बार चुमकार कर बुलाया, पर वह उसके पास न आया। हार में चारों तरफ दौड़-दौड़कर भूकता रहा। एक क्षण के लिए आ भी जाता, तो तुरंत ही फिर दौड़ता। कर्त्तव्य उसके हृदय में अरमान की भाँति उछल रहा था।
(ग) दोनों सज्जन फिर जो खेलने बैठे, तो तीन बज गए। अब की मिरज़ा जी की बाजी कमजोर थी। चार का गजर बज ही रहा था कि फौज की वापसी की आहट मिली। नवाब वाजिद अली पकड़ लिए गए थे और सेना उन्हें किसी अज्ञात स्थान को लिए जा रही थी। शहर में न कोई हलचल थी, न मार-काट। एक बूंद भी खून नहीं गिरा था। आज तक किसी स्वाधीन देश के राजा की पराजय इतनी शांति से, इस तरह खून बहे बिना न हुई होगी। यह वह अहिंसा न थी, जिस पर देवगण प्रसन्न होते हैं।
(घ) आशा तो बड़ी चीज है, और फिर बच्चों की आशा ! उनकी कल्पना तो राई का पर्वत बना लेती है। हामिद के पाँव में जूते नहीं हैं, सिर पर एक पुरानी धुरानी टोपी है, जिसका गोटा काला पड़ गया है, फिर भी वह प्रसन्न है। जब उसके अब्बाजान थैलियाँ और अम्मीजान नियामतें लेकर आयेंगी, तो वह दिल से अरमान निकाल लेगा। तब देखेगा, मोहसिन, नूरे और सम्मी कहाँ से उतने पैसे निकालेंगे। अभागिन अमीना अपनी कोठरी में बैठी रो रही है। आज ईद का दिन, उसके घर में दाना नहीं! आज आबिद होता, तो क्या इसी तरह ईद आती ओर चली जाती ! इस अंधकार और निराशा में वह डूबी जा रही है।

भाग-ख

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 750-800 शब्दों में दीजिए।
(1) प्रेमचंद के नाटकों का परिचय दीजिए।
(2) सुमन की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
(3) ‘ईदगाह कहानी की कथावस्तु का विवेचन कीजिए।

भाग-ग

3. निम्नलिखित विषयों पर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :
(1) प्रेमचंद का जीवन परिचय
(2) ‘पूस की रात’ कहानी का सार
(3) ‘पंच परमेश्वर’ कहानी का प्रतिपा

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